संग चले
जुनूँ में इश्क़ के बहल से गये, हर वो शख़्स जो तेरे संग चले मिलते गए रास्ते गलियाँ मंज़िलें, हमराह बस ना मिला जो संग चले खो से गए लम्हे नशात के, चलने को तो बस ग़म संग चले ढूँढ़ते रहे हम बेवफ़ा के पते, मिले ना उनसे जो रोज़ संग चले ~ अभिषेक शर्मा